बुधवार, 27 मई 2009

मेरा परिचाए



दोस्तो…….मेरा परिचाए केवल इतना ही, मई एक गुमशुदा नहर (केनाल) थी आप सब मे शामिल होकर दर्याफ़्त होगआई….ये खुदा की ही मेर्ज़ी थी के उन दिलों को क़लम थमा दिया जाए जिनसे उसे अपनी वाणी सुनने सुनाना चाहता था..और उनके लिए एक रहनमुआ भी भेजा उसने…दर्द से बड़ा रहनुमा और कोइ कहाँ…सो दर्द को हवा डेडी गई…और क़लम खुद खुदा कहता गया…दर्द मोहब्बत मे बहता गया…बस यह रही मेरी मेरे क़लम की दास्तान,तारूफ़ …मुझे उम्मीद है के मज़ीद तारूफ़ की कोइ ज़रूरत नही होगी…के क़लांकार समाज की डरोहर होता है..आप सब ने अपना बनाया मेहेरबानी आपकी….खुश रहें…

रहना चाँद

8 टिप्‍पणियां:

  1. वाह जी वाह क्या परिचय दिया है ! सुभान अल्लाह

    एक दास्तान -ऐ- ज़िन्दगी है वो,
    आप कहती हैं मुख्तसर जिसको .
    मुसलसल बहती एक नदी है वो,
    आप कहती हैं गुमशुदा नाहर जिसको .

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  2. जी ये नाहर नहीं नहर पढें -
    एक दास्तान -ऐ- ज़िन्दगी है वो,
    आप कहती हैं मुख्तसर जिसको .
    मुसलसल बहती एक नदी है वो,
    आप कहती हैं गुमशुदा नहर जिसको

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  3. माशा अल्लाह एक कवि की प्रशंसा के लिए एक कविता से बढ़ कर क्या होसकता है..आपने इन 4 पंतिोन को गुलदस्ता बना डाला..शुक्रिया...

    चाँद

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  4. आपकी कविता की तारीफ़ में जो चार लाइन लिखी थी वो आपसे माँगना चाहता हूँ ताकि उनमें कुछ और जोड़ कर एक ग़ज़ल का रूप दे सकूं

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  5. मई मुंतज़ार हूँ के आप की गाज़ल कैसी होगी..जुब के शुरू की पँतियाँ मेरे परिचाया को एक नया रंग दे गयीं...लिखें ज़रूर...

    चाँद

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  6. रेहाना चाँद जी के परिचय के जवाब में

    हम कहते हैं एक नई शहर उसको ,
    आप कहती हैं गुमशुदा डगर जिसको.
    एक दास्तान -ऐ- ज़िन्दगी है वो,
    आप कहती हैं फ़क़त मुख्तसर जिसको .
    मुसलसल बहती एक नदी है वो,
    आप कहती हैं गुमशुदा नहर जिसको.
    खुदा और दोस्तों का है करम बेशक,
    लोग कहते हैं आपकी ज़बर उसको .
    खुदा करे अविरल यूं ही बहती रहे ,
    आप कहती हैं फ़क़त नहर जिसको .
    आपके दिल से जो पीर निकली है,
    लोग कहते हैं आपकी नज़म उसको .
    आपकी आला कलम से जो निकला है ,
    प्रदीप झुकाता है अपना सर उसको .

    ghazal apne blog per bhi post kar di hai .yahaan isliye post kar rahaa hoon ki pataa nahi wahaan aap padh paayein ya nahi !

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  7. शुक्रिया प्रदीप जी इस इज़्ज़त अफज़ाी का..आपने खूब लिखा बुल्की अछा लिखा..वैसे आप ने किस ब्लॉग पेर पोस्ट किया है..देखूं तो...

    चाँद

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