
कोइ बाज़म-ए-ख़याल फिर सजे
कोइ समान-ए-घूम तो हो
कोइ जूसतजू फिर दिल की करे
कोइ उम्मीद मुबहाँ तो हो
कोइ सताए फिर आकर हुमें
कोइ दर्द फिर कूम तो हो
कोइ हासिल-ए-दीवानगी ना नही
कोइ सिला मेरे हुंदम तो हो
कोइ शुमार अख़्तर क्या करे
कोइ शब ऐसी सनम तो हो
कोइ जुनून जागे फिर ख्वाब से
कोइ ऐसा हसीन सितम तो हो
कोइ घड़ी ज़ीस्ट सी भी लगे
कोइ लम्हा चाँद करम तो हो



