मंगलवार, 26 मई 2009

ना चीनो नादनो


ना चीनो नादनो मुझ से जवानी मेरी
बड़े नाज़ नखरों से रुकी है अभी
जो जेया के ना आए वो बाहर है
इष्क़ की फ़िज़ा मे डोले है अभी
खूबसूरत है ये,बे-वफ़ा है ज़ालिम अदा
हेर नज़र उस की महबूब है अभी
क़ातल महबूब जाने,इस ने कितने किए
हेर वार इस का कारी है अभी
हुस्न को है इबादत का दर्जा दिया
और खुद काफ़िर बनी खड़ी है अभी
लम्हा लम्हा जीने दो इस में मुझे
ज़िंदगी का इस में मज़ा है अभी
वो मेरी हम सफ़र है हमराज़ है
चाँदकभी रुकी ना रुके है अभी

शनिवार, 23 मई 2009

कोइ बाज़म-ए-ख़याल फिर सजे


कोइ बाज़म--ख़याल फिर सजे
कोइ समान--घूम तो हो
कोइ जूसतजू फिर दिल की करे
कोइ उम्मीद मुबहाँ तो हो
कोइ सताए फिर आकर हुमें
कोइ दर्द फिर कूम तो हो
कोइ हासिल--दीवानगी ना नही
कोइ सिला मेरे हुंदम तो हो
कोइ शुमार अख़्तर क्या करे
कोइ शब ऐसी सनम तो हो
कोइ जुनून जागे फिर ख्वाब से
कोइ ऐसा हसीन सितम तो हो
कोइ घड़ी ज़ीस्ट सी भी लगे
कोइ लम्हा चाँद करम तो हो

शुक्रवार, 22 मई 2009

चाहा था


चाहा था बहुत चाहतों को हम आम करेंगे
दुनिया याद रखे ऐसे कुछ काम करेंगे
कहाँ जानते थे, के यही है फरमान--खुदा
अपने ही दिल का मातम सुबा शाम करेंगे
ये सच नही के यहाँ प्यार मोहब्बत की कमी है
जहाँ हो नूवर--मोहब्बत,वहाँ शैतान क़ायम करेंगे
बरसों से भटकती इस प्यासी रूह का समान
सरकार की एक नज़र का हासिल जाम करेंगे
खुद की तलाश में गर मिल गया खुदा
तुम्हारी ही रहबरी में सफ़र तमाम करेंगे
तुम्हारी मिलगाई, मिल जाएगी सरकार की निगाह
हक़ मोहब्बत का अदा हम हेर गाम करेंगे

आए ताज


आए ताज तुझे जिसने भी बनाया होगा
अपने महबूब से नज़र चुराया होगा
मायूस निगाहों में महेबूब की उसको
अक्स ताज का ही नज़र आया होगा
गर मुमताज़ थी मोहब्बत उस की
खुद को ताज पे खड़ा पाया होगा
शाहों ने यह कैसी मोहब्बत की थी
आहों से सुंग भी गरमाया होगा
थी अदा--मोहब्बत के घुरूर--शहान
इश्क़ भी खुद से गब्राया होगा
हेर दर्द कहेगा आए शाह--जहाँ
ताज ने चाँद का दर्द सजाया होगा